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इतिहास


मध्‍य प्रदेश की स्‍थापना 1 नवंबर, 1956 का हुई। नया राज्‍य छत्‍तीसगढ़ बनाने के लिए हुए विभाजन के बाद यह अपने वर्तमान स्‍वरूप में 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्‍व में आया। मध्‍य प्रदेश उत्‍तर में उत्‍तर प्रदेश, पूर्व में छत्‍तीसगढ़ त‍था पश्चिम में राजस्‍थान और गुजरात, दक्षिण में महाराष्‍ट्र से घिरा है।मध्‍य प्रदेश 30, 8,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ दूसरा सबसे बड़ा भारतीय राज्‍य है। भौगोलिक दृष्टि से यह देश में एक केन्‍द्रीय स्‍थान रखता है।

सम्राट अशोक ने सबसे पहले उज्‍जैन पर शासन किया। मध्‍य भारत का काफी बड़ा हिस्‍सा गुप्‍त साम्राज्‍य (300-500 ईसवी) का भाग था। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी के प्रारंम्‍भ में मध्‍य भारत में मुसलमानों का आगमन हुआ। सबसे पहले महमूद गज़नवी यहां आया और फिर मुहम्‍मद गौरी आया, जिसने वहां के कुछ भागों को अपनी दिल्‍ली सल्‍तनत में मिला लिया। मध्‍य भारत मुगल साम्राज्‍य का भी हिस्‍सा रहा। मराठों का प्रभाव आरंभ होने से लेकर 1794 में माधवजी सिंधिया के देहांत तक मध्‍य भारत पर मराठों का बोलबाला रहा। परंतु उसके बाद छोटे-छोटे स्‍वतंत्र राज्‍य बनने लगे। ये छोटे राज्‍य ही आगे चलकर ब्रिटिश सत्‍ता के जमने का कारण बने।

इंदौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर, गोंड की महारानी कमलापति और रानी दुर्गावती आदि कुछ महान महिला शासकों ने अपने उत्‍कृष्‍ट शासन के लिए भारतीय इतिहास में अपना नाम स्‍वर्णाक्षरों में लिखवा लिया।